क्रिप्टोकरेंसी का खनन कैसे किया जाता है? क्रिप्टो माइनिंग के बारे में सारी जानकरी।

दोस्तों जैसे सोने की मात्रा दुनिया में लिमिटेड है उसी प्रकार क्रिप्टोकोर्रेंसी को भी बनाते समय ही लिमिटेड रखा जाता है जैसे की अगर कोई नई क्रिप्टो मुद्रा बनाए जाएगी तो उसी समय में ये फिक्स कर दिया जायेगा की ये मुद्रा कितनी मात्रा में होगी। उसी प्रकार सोने और दूसरी धातुएं भी दुनिया में लिमिटेड है और जो चीजे प्रकर्ति ने लिमिटेड बनाई बनाई है उनको माइनिंग करके ही प्राप्त किया जाता है चाहे वो सोना चाँदी हो या फिर पेट्रोलियम पदार्थ हो उनको माइनिंग यानि की खनन करके ही प्राप्त किया जाता है और इसी प्रकार क्रिप्टोकोर्रेंसी में भी खनन होता है हालाँकि इसमें होने वाला खनन अलग तरीके का होता है और इसके बारे में हम इस पोस्ट में बात करने वाले है।

क्रिप्टोकरेंसी का खनन कैसे किया जाता है? क्रिप्टो माइनिंग के बारे में सारी जानकरी।
क्रिप्टोकरेंसी का खनन कैसे किया जाता है? क्रिप्टो माइनिंग के बारे में सारी जानकरी।

क्रिप्टोकरेंसी का खनन क्या होता है।

क्रिप्टोकोर्रेंसी में खनन की बात करे तो इसमें जो क्रिप्टोकोर्रेंसी की माइनिंग होती है वो अपनी नार्मल माइनिंग से थोड़ी अलग होती है। समय तोर पर तो किसी चीज़ को जमीं से खोदकर निकलने की प्रक्रिया को ही खनन कहा जाता है लेकिन जब बात आती है क्रिप्टोकोर्रेंसी खनन की तो इसमें चीजे थोड़ी बदल जाती है।

जब किसी क्रिप्टोकोर्रेंसी को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजा जाता है तो उनकी ट्रांसेकशन की स्पीड को बढ़ने के लिए बिच में कुछ दूसरी डिवाइस का उपयोग किया जाता है। और ये डिवाइस ट्रांसेकशन की स्पीड को बढ़ा देते है लेकिन ट्रांसेकशन करने के लिए इन डिवाइस के मिल्क को कुछ चार्ज देना होता है उसे ही हम क्रिप्टो माइनिंग कहते है।

जब भी कोई ट्रांसेकशन होता है तो ट्रांसेकशन में भागीदार वबनने वाले डिवाइस के मिल्क को ट्रांसेकशन में से कुछ परसेंटेज देना होता है जो की बहुत ही कम होता है। हालाँकि जब ट्रांसेकशन बड़ी होती है और अगर वो हमारी डिवाइस के माध्यम से होती है तो हमे ज्यादा माइनिंग का प्रॉफिट मिलता है लेकिन छोटी होने पर ये अमाउंट छोटी ही होती है।

क्रिप्टोकरेंसी का खनन कैसे काम करता है।

क्रिप्टो माइनिंग की बात करे तो इसके काम करने का तरीका थोड़ा अलग है। जैसे की किसी डिवाइस से क्रिप्टोकोर्रेंसी को भेजा जाता है उसी टाइम क्रिप्टोकोर्रेंसी सबसे निकटतम और सबसे फ़ास्ट डिवाइस में जाती है जो की ब्लॉकचैन सी जुड़ा रहता है। इसके बाद में वो डेविड वापस से क्रिप्टो के सिग्नल को दूसरे ब्लॉक में भेजता है और साथ में उस ट्रांसेकशन का डाटा भी खुद में स्टोर कर लेता है। और साथ में वो जिस प्लेटफार्म से जुड़ा हुवा होता है उसके अनुसार ही चार्ज काट लेता है और खुद के वॉलेट में स्टोर कर लेता है जिसे ही क्रिप्टो माइनिंग या क्रिप्टो खनन कहा जाता है।

ये प्रोसेस बहुत ही तेज़ गति से होता है और ट्रांसेकशन का डाटा भी सभी डिवाइस में रिकॉर्ड होता रहता है तो इसके बाद में अगर कोई किसी डाटा को बदलना चाहे तो भी नही बदल पायेगा क्युकी ये वापस पुराने डिवाइस से वेरीफाई होता है जो की डिक्लाइन हो जायेगा। तो इस तरह से क्रिप्टोकोर्रेंसी की माइनिंग होती है और साथ में सबसे ज्यादा सुरक्षित भी रहती है।

क्रिप्टोमाइनिंग निष्कर्ष

इस पोस्ट में हमने बात करि है की कैसे क्रिप्टोकोर्रेंसी की माइनिंग की जाती है यानि की क्रिप्टोकोर्रेंसी का खनन क्या होता है। और साथ में हमने ये भी सीखा है की कैसे क्रिप्टोकोर्रेंसी में माइनिंग काम करती है हालाँकि क्रिप्टोकोर्रेंसी के काम करने का टेक्निकल पार्ट थोड़ा डिफिकल्ट है लेकिन फिर भी सिंपल तरीके से तो हमने बात कर ही ली है की कैसे क्रिप्टो मुद्रा खनन काम करता है और इसका क्या क्या उपयोग है।

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